मुहूर्त

दो घटी मुहूर्त: ३० दैनिक वैदिक मुहूर्त

चयनित स्थान और तिथि के लिए पारंपरिक दो घटी मुहूर्त के विभाग देखें।

गुरुवार, २२ अक्टूबर २०२६

सूर्योदय
६:१३ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
५:४३ अपराह्न
दिन / रात
दिन ११ घं ३० मि
रात १२ घं ३१ मि

वर्तमान दो घटी

भग (सायंकाल)

४:५७ अपराह्न - ५:४३ अपराह्न

भग — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है। — अशुभ

अभी

दिन का दो घटी मुहूर्त

६:१३ पूर्वाह्न – ५:४३ अपराह्न

क्र.Muhuratसमय
१
रुद्र (प्रातः)अशुभ
रुद्र — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
६:१३ पूर्वाह्न-६:५९ पूर्वाह्न
२
उरग (प्रातः)अशुभ
उरग — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
६:५९ पूर्वाह्न-७:४५ पूर्वाह्न
३
मित्र (प्रातः)शुभ
मित्र — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
७:४५ पूर्वाह्न-८:३१ पूर्वाह्न
४
पितर (संगव)अशुभ
पितर — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
८:३१ पूर्वाह्न-९:१७ पूर्वाह्न
५
वसु (संगव)शुभ
वसु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
९:१७ पूर्वाह्न-१०:०३ पूर्वाह्न
६
अम्बु (संगव)शुभ
अम्बु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
१०:०३ पूर्वाह्न-१०:४९ पूर्वाह्न
७
विश्वेदेव (मध्याह्न)शुभ
विश्वदेव — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
१०:४९ पूर्वाह्न-११:३५ पूर्वाह्न
८
विधि (मध्याह्न)शुभ
विधि — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
११:३५ पूर्वाह्न-१२:२१ अपराह्न
९
ब्रह्मा (मध्याह्न)शुभ
ब्रह्मा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
१२:२१ अपराह्न-१:०७ अपराह्न
१०
इन्द्र (अपराह्न)शुभ
इन्द्र — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
१:०७ अपराह्न-१:५३ अपराह्न
११
इन्द्राग्नि (अपराह्न)अशुभ
इन्द्राग्नि — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
१:५३ अपराह्न-२:३९ अपराह्न
१२
दैत्य (अपराह्न)अशुभ
दैत्य — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
२:३९ अपराह्न-३:२५ अपराह्न
१३
वरुण (सायंकाल)शुभ
वरुण — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
३:२५ अपराह्न-४:११ अपराह्न
१४
अर्यमा (सायंकाल)शुभ
अर्यमा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
४:११ अपराह्न-४:५७ अपराह्न
१५
भग (सायंकाल)अभीअशुभ
भग — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
४:५७ अपराह्न-५:४३ अपराह्न

रात का दो घटी मुहूर्त

५:४३ अपराह्न – ६:१४ पूर्वाह्न

क्र.Muhuratसमय
१६
ईश्वर (प्रदोष)अशुभ
ईश्वर — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
५:४३ अपराह्न-६:३३ अपराह्न
१७
अजैकपाद (प्रदोष)अशुभ
अजैकपाद — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
६:३३ अपराह्न-७:२३ अपराह्न
१८
अहिर्बुध्न्य (प्रदोष)शुभ
अहिर्बुध्न्य — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
७:२३ अपराह्न-८:१३ अपराह्न
१९
पूषा (रात्रि)शुभ
पूषा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
८:१३ अपराह्न-९:०३ अपराह्न
२०
अश्विनी (रात्रि)शुभ
अश्विनी — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
९:०३ अपराह्न-९:५३ अपराह्न
२१
यम (रात्रि)अशुभ
यम — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
९:५३ अपराह्न-१०:४३ अपराह्न
२२
अग्नि (निशीथ)अशुभ
अग्नि — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।
१०:४३ अपराह्न-११:३३ अपराह्न
२३
ब्रह्मा (निशीथ)शुभ
ब्रह्मा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
११:३३ अपराह्न-१२:२३ पूर्वाह्न
२४
चन्द्र (निशीथ)शुभ
चन्द्र — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
१२:२३ पूर्वाह्न-१:१३ पूर्वाह्न
२५
अदिति (उषा)शुभ
अदिति — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
१:१३ पूर्वाह्न-२:०३ पूर्वाह्न
२६
बृहस्पति (उषा)शुभ
बृहस्पति — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
२:०३ पूर्वाह्न-२:५३ पूर्वाह्न
२७
विष्णु (उषा)शुभ
विष्णु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
२:५३ पूर्वाह्न-३:४३ पूर्वाह्न
२८
सूर्य (अरुणोदय)शुभ
सूर्य — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
३:४३ पूर्वाह्न-४:३३ पूर्वाह्न
२९
त्वष्टा (अरुणोदय)शुभ
त्वष्टा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
४:३३ पूर्वाह्न-५:२३ पूर्वाह्न
३०
समीरण (अरुणोदय)शुभ
समीरणा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
५:२३ पूर्वाह्न-६:१४ पूर्वाह्न

शुभ दो घटी अवधि

पारंपरिक रूप से अनुकूल माना जाता है

शुभ १
मित्र
प्रातः
७:४५ पूर्वाह्न – ८:३१ पूर्वाह्न

मित्र — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

शुभ २
वसु
संगव
९:१७ पूर्वाह्न – १०:०३ पूर्वाह्न

वसु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

शुभ ३
अम्बु
संगव
१०:०३ पूर्वाह्न – १०:४९ पूर्वाह्न

अम्बु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

शुभ ४
विश्वेदेव
मध्याह्न
१०:४९ पूर्वाह्न – ११:३५ पूर्वाह्न

विश्वदेव — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

सामान्यतः त्यागें

परंपरागत रूप से अशुभ माना जाता है

त्यागें
रुद्र
प्रातः
६:१३ पूर्वाह्न – ६:५९ पूर्वाह्न

रुद्र — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

त्यागें
उरग
प्रातः
६:५९ पूर्वाह्न – ७:४५ पूर्वाह्न

उरग — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

त्यागें
पितर
संगव
८:३१ पूर्वाह्न – ९:१७ पूर्वाह्न

पितर — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

त्यागें
इन्द्राग्नि
अपराह्न
१:५३ अपराह्न – २:३९ अपराह्न

इन्द्राग्नि — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

दो घटी मुहूर्त के बारे में

दो घटी मुहूर्त पंचांग दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करता है। पंद्रह सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच और पंद्रह सूर्यास्त और अगले सूर्योदय के बीच होते हैं। प्रत्येक मुहूर्त में दो घटी होती हैं।

एक दो घटी अवधि की वास्तविक अवधि 48 मिनट निश्चित नहीं होती है। दिन के समय को 30 घटियों में और रात के समय को भी 30 घटियों में विभाजित किया जाता है, इसलिए अवधि चयनित तिथि और स्थान के अनुसार बदलती रहती है।

रुद्र१

रुद्र — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

उरग२

उरग — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

मित्र३

मित्र — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

पितर४

पितर — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

वसु५

वसु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

अम्बु६

अम्बु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

विश्वेदेव७

विश्वदेव — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

विधि८

विधि — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

ब्रह्मा९

ब्रह्मा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

इन्द्र१०

इन्द्र — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

इन्द्राग्नि११

इन्द्राग्नि — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

दैत्य१२

दैत्य — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

वरुण१३

वरुण — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

अर्यमा१४

अर्यमा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

भग१५

भग — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

ईश्वर१६

ईश्वर — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

अजैकपाद१७

अजैकपाद — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

अहिर्बुध्न्य१८

अहिर्बुध्न्य — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

पूषा१९

पूषा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

अश्विनी२०

अश्विनी — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

यम२१

यम — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

अग्नि२२

अग्नि — पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है।

ब्रह्मा२३

ब्रह्मा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

चन्द्र२४

चन्द्र — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

अदिति२५

अदिति — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

बृहस्पति२६

बृहस्पति — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

विष्णु२७

विष्णु — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

सूर्य२८

सूर्य — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

त्वष्टा२९

त्वष्टा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

समीरण३०

समीरणा — पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

शुभ और अशुभ वर्गीकरण पारंपरिक व्याख्याओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। क्षेत्रीय पंचांग परंपराएं शब्दावली या वर्गीकरण में भिन्न हो सकती हैं।