स्वर सिद्धांत

१०८ नक्षत्र चरणों के नामाक्षर

२७ नक्षत्रों में से हर एक के चार चरण हैं, और हर चरण का वह अक्षर है जिससे नाम परंपरा से शुरू होता है। किसी अक्षर को चुनकर उससे शुरू होने वाले नाम देखें।

नक्षत्रचरण १चरण २चरण ३चरण ४
१. अश्विनीचु, चूचे, चैचो, चौला, ल
२. भरणीली, लिलू, लुले, लैलो, लौ
३. कृत्तिकाअ, आई, इउ, ऊए, ऐ
४. रोहिणीओ, औवा, ववी, विवु, वू
५. मृगशिरावे, वैवो, वौका, ककी, कि
६. आर्द्राकु, कूघ, घाङ, छछ, छा
७. पुनर्वसुके, कैको, कौहा, हही, हि
८. पुष्यहु, हूहे, हैहो, हौडा, ड
९. आश्लेषाडी, डिडू, डुडे, डैडो, डौ
१०. मघामा, ममी, मिमू, मुमे, मै
११. पूर्वाफाल्गुनीमो, मौटा, टटी, टिटू, टु
१२. उत्तराफाल्गुनीटे, टैटो, टौपा, पपी, पि
१३. हस्तपू, पुष, षाण, णाठ, ठा
१४. चित्रापे, पैपो, पौरा, ररी, रि
१५. स्वातिरू, रुरे, रैरो, रौता, त
१६. विशाखाती, तितू, तुते, तैतो, तौ
१७. अनुराधाना, ननी, निनू, नुने, नै
१८. ज्येष्ठानो, नौया, ययी, यियू, यु
१९. मूलये, यैयो, यौभा, भभी, भि
२०. पूर्वाषाढ़ाभू, भुधा, धफा, फढ, ढा
२१. उत्तराषाढ़ाभे, भैभो, भौजा, जजी, जि
२२. श्रवणखी, खिखू, खुखे, खैखो, खौ, षो, षौ
२३. धनिष्ठागा, गगी, गिगु, गूगे, गै
२४. शतभिषागो, गौसा, ससी, सिसू, सु
२५. पूर्वाभाद्रपदसे, सैसो, सौदा, ददी, दि
२६. उत्तराभाद्रपददू, दुथ, थाझ, झाञ, दा
२७. रेवतीदे, दैदो, दौच, चाची, चि

स्वर सिद्धांत क्या है?

स्वर सिद्धांत ध्वनियों को नक्षत्रों से जोड़ता है। राशिचक्र के ३६० अंश १३°२०′ के २७ नक्षत्रों में बँटे हैं, और हर नक्षत्र ३°२०′ के चार चरणों में: कुल १०८ भाग, हर एक का अपना अक्षर।

नक्षत्र चरण से नाम क्यों?

चंद्रमा मन का कारक है। जन्म के समय चंद्रमा के चरण के अक्षर से शुरू होने वाला नाम शिशु को उससे सामंजस्य में रखता है, ऐसी मान्यता है, इसीलिए नामकरण संस्कार में इसका प्रयोग होता है।

एक चरण, कई रूप

एक चरण का अक्षर प्रायः अपने संबंधित रूपों के साथ दिया जाता है, जैसे ह्रस्व और दीर्घ स्वर (चु, चू)। नाम इनमें से किसी से भी शुरू हो सकता है।