कार और बाइक खरीदने की शुभ तिथियाँ

वाहन खरीद की तिथियाँ, अगस्त २०२६

अगस्त २०२६ में 10 शुभ वाहन खरीद तिथियाँ: ७, ९, १०, १६, १७, २०, २६, २७, २८, और ३१ अगस्त।

10 तिथियाँ७ अगस्त – ३१ अगस्त

वाहन खरीद की शुभ तिथियाँ, शुभ डिलीवरी का समय, तिथि और नक्षत्र आपके स्थान के लिए गणना किए गए।

समय नई दिल्ली के लिए हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए कोई समय मध्यरात्रि के बाद भी पड़ सकता है; तब उसकी तारीख दिखाई जाती है।

अगस्त २०२६

10 तिथियाँ · नई दिल्ली

रविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि
१२३४५६८१११२१३१४१५१८१९२१२२२३२४२५२९३०

शुक्रवार, ७ अगस्त २०२६

६:४३ अपराह्न → ५:४७ पूर्वाह्न, शनि, ८ अगस्त(११h ४m)
रोहिणीदशमी

अगस्त की सभी 10 तिथियाँ

वाहन खरीद मुहूर्त, अगस्त २०२६

वाहन खरीद मुहूर्त कार, बाइक या किसी भी वाहन को खरीदने या उसकी डिलीवरी लेने का शुभ समय है। मंगलवार और शनिवार छोड़े जाते हैं, साथ ही पितृ पक्ष और अधिक मास भी, और केवल अनुकूल नक्षत्र व तिथि वाले घंटे दिखाए जाते हैं।

मुहूर्त आमतौर पर वाहन के भुगतान या डिलीवरी के लिए रखा जाता है, और कई परिवार पहली सवारी से पहले छोटी पूजा करते हैं। यदि डिलीवरी की तारीख डीलर तय करता है तो यहाँ दिए गए सबसे नज़दीकी समय को चुनें।

वाहन खरीद के वैदिक मापदंड:

  • वार: रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार। मंगलवार और शनिवार छोड़े जाते हैं।
  • अनुकूल नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती।
  • तिथियाँ: शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, द्वितीया, चतुर्थी, सप्तमी, नवमी, द्वादशी और चतुर्दशी छोड़ी जाती हैं; कृष्ण पक्ष की द्वितीया, चतुर्थी, सप्तमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी और अमावस्या भी छोड़ी जाती हैं।
  • छोड़े जाने वाले समय: पितृ पक्ष (भाद्रपद पूर्णिमा के बाद का कृष्ण पक्ष) और अधिक मास।
  • समय-खंड: केवल वे घंटे दिखाए जाते हैं जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों अनुकूल हों। ५ मिनट से छोटा खंड, या रात ९ बजे या उसके बाद शुरू होने वाला खंड छोड़ दिया जाता है।

सामान्य प्रश्न

वाहन खरीदने के लिए कौन-से दिन टाले जाते हैं?

मंगलवार और शनिवार, पितृ पक्ष (भाद्रपद पूर्णिमा के बाद का कृष्ण पक्ष) और अधिक मास।

कौन-से नक्षत्र और तिथियाँ अनुकूल हैं?

अनुकूल नक्षत्र हैं रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, द्वितीया, चतुर्थी, सप्तमी, नवमी, द्वादशी और चतुर्दशी छोड़ी जाती हैं, तथा कृष्ण पक्ष की द्वितीया, चतुर्थी, सप्तमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी और अमावस्या भी।

देर रात के घंटे क्यों नहीं दिए जाते?

रात ९ बजे या उसके बाद शुरू होने वाला खंड छोड़ दिया जाता है, और ५ मिनट से छोटा कोई भी खंड भी, जैसा द्रिक पंचांग में है।

क्या ये तिथियाँ द्रिक पंचांग से मेल खाती हैं?

हम परिणामों को द्रिक पंचांग से मिलाते हैं। २०२६ के लिए नई दिल्ली में उसके दिए हुए सभी ८८ दिन यहाँ मिलते हैं; हम एक अतिरिक्त रात का खंड भी देते हैं जो द्रिक पंचांग में नहीं है।