जनवरी २०२६
आरंभ: १२:३० अपराह्न, ४ जन॰
समाप्ति: ३:११ अपराह्न, ४ जन॰
वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: कृष्ण द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: पुनर्वसु
त्रिपुष्कर योग तब तक रहता है जब रविवार, मंगलवार या शनिवार को भद्रा तिथि (किसी भी पक्ष की द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी) हो और चंद्रमा कृत्तिका, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढ़ा या पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में हो।
३:३९ अपराह्न, २७ अक्टू॰
स्थान: भारत · वर्ष: २०२६
आरंभ: १२:३० अपराह्न, ४ जन॰
समाप्ति: ३:११ अपराह्न, ४ जन॰
वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: कृष्ण द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: पुनर्वसु
आरंभ: ६:४० पूर्वाह्न, २४ फ़र॰
समाप्ति: ७:०२ पूर्वाह्न, २४ फ़र॰
वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: शुक्ल सप्तमी · चंद्र नक्षत्र: कृत्तिका
आरंभ: ६:३७ पूर्वाह्न, २८ फ़र॰
समाप्ति: ९:३४ पूर्वाह्न, २८ फ़र॰
वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: शुक्ल द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: पुनर्वसु
आरंभ: ४:०५ अपराह्न, १४ अप्रैल
समाप्ति: १२:१२ पूर्वाह्न, १५ अप्रैल
वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: कृष्ण द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद
आरंभ: ७:०९ पूर्वाह्न, १९ अप्रैल
समाप्ति: १०:४९ पूर्वाह्न, १९ अप्रैल
वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: शुक्ल द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: कृत्तिका
आरंभ: ५:४४ पूर्वाह्न, २८ अप्रैल
समाप्ति: ६:५२ अपराह्न, २८ अप्रैल
वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: शुक्ल द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
आरंभ: १२:५० पूर्वाह्न, ३ मई
समाप्ति: ५:४० पूर्वाह्न, ३ मई
वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: कृष्ण द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: विशाखा
आरंभ: ५:४० पूर्वाह्न, ३ मई
समाप्ति: ७:०९ पूर्वाह्न, ३ मई
वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: कृष्ण द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: विशाखा
आरंभ: ४:१२ अपराह्न, १६ जून
समाप्ति: १२:५२ पूर्वाह्न, १७ जून
वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: शुक्ल द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: पुनर्वसु
आरंभ: ९:३१ पूर्वाह्न, २१ जून
समाप्ति: ३:२१ अपराह्न, २१ जून
वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: शुक्ल सप्तमी · चंद्र नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
आरंभ: ५:३६ पूर्वाह्न, ११ जुल॰
समाप्ति: ११:०३ पूर्वाह्न, ११ जुल॰
वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: कृष्ण द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: कृत्तिका
आरंभ: ५:५५ पूर्वाह्न, २५ अग॰
समाप्ति: ६:२१ पूर्वाह्न, २५ अग॰
वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: शुक्ल द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
आरंभ: ९:५७ पूर्वाह्न, २९ अग॰
समाप्ति: ३:४२ पूर्वाह्न, ३० अग॰
वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: कृष्ण द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद
आरंभ: ७:४६ पूर्वाह्न, १२ सित॰
समाप्ति: १२:५५ अपराह्न, १२ सित॰
वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: शुक्ल द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
आरंभ: ३:३९ अपराह्न, २७ अक्टू॰
समाप्ति: ४:०७ पूर्वाह्न, २८ अक्टू॰
वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: कृष्ण द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: कृत्तिका
आरंभ: ४:५७ अपराह्न, ३१ अक्टू॰
समाप्ति: ५:३९ पूर्वाह्न, १ नव॰
वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: कृष्ण सप्तमी · चंद्र नक्षत्र: पुनर्वसु
आरंभ: ३:४२ अपराह्न, २९ दिस॰
समाप्ति: ६:५३ पूर्वाह्न, ३० दिस॰
वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: कृष्ण सप्तमी · चंद्र नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
त्रिपुष्कर योग तब तक रहता है जब रविवार, मंगलवार या शनिवार को भद्रा तिथि (किसी भी पक्ष की द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी) हो और चंद्रमा कृत्तिका, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढ़ा या पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में हो।
त्रिपुष्कर योग को परंपरागत रूप से ऐसे कार्यों से जोड़ा जाता है जिनका फल तीन गुना माना जाता है।
त्रिपुष्कर शब्द इस पारंपरिक विश्वास को दर्शाता है कि इस योग में शुरू किया गया कार्य तीन गुना फल दे सकता है।
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